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June 19, 2026
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केपी यादव के पत्र पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तोड़ी चुप्पी, कहा-वो परिवार के सदस्य


कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) और गुना से सांसद केपी यादव (Guna MP KP Yadav) के बीच चल विवाद कोई नया नहीं है, लेकिन सिंधिया के बीजेपी ज्वाइन करने के बाद इन के बीच का विवाद बढ़ता जा रहा है. सांसद केपी यादव ने बीजेपी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा (BJP President Jagat Prakash Nadda) को पत्र लिख आरोप लगाया है कि सिंधिया के समर्थकों द्वारा उनकी अनदेखी की जा रही है. यादव ने कहा कि 2020 में कांग्रेस छोड़ने के बाद बीजेपी में शामिल हुए सिंधिया समर्थक पार्टी के नए कार्यकर्ताओं, पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं और नेता उन के साथ अपमानजनक व्यवहार कर रहे हैं. जिस के बाद अब सिंधिया ने इस मुद्दे पर के. पी यादव को विवाद को खत्म करने की सलाह देते हुए कहा कि सभी को संगठन में साथ मिलकर काम करना होगा और यदि मतभेद हैं तो उन्हें सुलझा लिया जाएगा.
दरअसल आठ दिसंबर को लिखा दो पन्नों का यह पत्र कुछ दिन पहले ही सामने आया है. पत्र में केपी यादव ने कहा है कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के कई कार्यकर्ता और मध्य प्रदेश के मंत्री पार्टी के बजाय सिंधिया के प्रति वफादार हैं और उनक अनादर भी करते रहे हैं.
किसी कार्यक्रम में नहीं करते आमंत्रित : गुना से सांसद ने यह भी आरोप लगाया था कि सिंधिया समर्थक उन्हें क्षेत्र में पार्टी के कार्यक्रमों की जानकारी नहीं दे रहे हैं और उन्हें किसी कार्यक्रम में आमंत्रित भी नहीं कर रहे हैं. बता दें कि केपी यादव ने 2019 के लोकसभा चुनाव में गुना से सिंधिया को 1.25 लाख से अधिक वोटो से हराया था.
‘सबको मिलकर करना होगा काम’ : पत्र के बारे में पूछे जाने पर सिंधिया ने कहा है कि चाहे वह मंत्री हों या बूथ स्तर के कार्यकर्ता, सभी को पार्टी में मिलकर काम करना होगा. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें यादव के पत्र की जानकारी है और लोकसभा सांसद उनके परिवार के सदस्य की तरह हैं. सिंधिया ने कहा, ‘केपी यादव परिवार के सदस्य हैं और हर कार्यकर्ता, चाहे वह मंत्री हो या बूथ स्तर का कार्यकर्ता, सभी हमारे हैं और सभी को मिलकर काम करना होगा. अब यदि मिलन की कमी होगी तो वह भी पूरी हो जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में जो जिम्मेदारियां मिली हैं, उन्हें सभी को साथ मिलकर निभाना चाहिए.’

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