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हाथ नहीं हैं तो क्या हुआ हौसला तो है… मुंह में टेबल टेनिस का बैट फंसा पैरालिंपिक खेल रहे

जापान की राजधानी में ओलिंपिक के बाद अब पैरालिंपिक गेम्स हो रहे हैं। दुनिया भर के दिव्यांग खिलाड़ी यहां अपना जौहर दिखा रहे हैं। शारीरिक बाधाओं को चुनौती देते हुए अपना टैलेंट दुनिया के सामने रख रहे हैं। किसी का हाथ नहीं हैं तो कोई पैरों से लाचार हैं, लेकिन हर बार जीत जीवटता की होती है। विजयी वो सोच होती है जो इनके भीतर आत्मविश्वास भरती है।
हादसे में गंवाए दोनों हाथ : ऐसी ही एक तस्वीर आपको दिखा रहे हैं, जिसमें इजिप्ट (मिस्त्र) के 48 वर्षीय इब्राहिम अलहुसैनी टेबल टेनिस खेल रहे हैं। जब वह 10 साल के थे तो ट्रेन हादसे में अपने दोनों हाथ गवां दिए। इस घटना ने भले ही उनके हाथ छीन लिए, लेकिन हिम्मत तो बरकरार है। तभी तो टेबल टेनिस का बैट मुंह में पकड़ लिया। सर्विस के लिए पैर का इस्तेमाल करते हैं।
कोशिश से कुछ भी असंभव नहीं : अपना दूसरा पैरालिंपिक खेल रहे इब्राहिम की यह फोटो तब क्लिक की गई, जब वह कोरियाई खिलाड़ी होंग पार्क से लोहा ले रहे थे। इब्राहिम अलहुसैनी अकेले प्रेरणा के प्रतीक नहीं हैं। उनकी तरह इस ओलिंपिक में भाग लेने वाला हर ऐथलीट दुनिया को संदेश दे रहा है कि हालात कैसे भी हो लेकिन कोशिश से कुछ भी असंभव नहीं।
नॉकआउट दौर में भारत की भाविना बेन : भाविना बेन ग्रेट ब्रिटेन की मेगान शैकलटन पर 3-1 की जीत से महिला एकल क्लास 4 के नॉकआउट दौर में पहुंच गईं। भारत की 34 वर्षीय खिलाड़ी ने विश्व में नौवें नंबर की शैकलटन को 41 मिनट तक चले मैच में 11-7, 9-11, 17-15, 13-11 से हराया। विश्व में 12वें नंबर की भारतीय के लिये यह करो या मरो वाला मैच था।

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