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September 18, 2026
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‘हाथ काटना बहुत जरूरी है’… तालिबान नेता मुल्ला तुराबी बोला- सख्त इस्लामी कानून लागू करेंगे, फांसी भी देंगे

‘हाथ काटना बहुत जरूरी है’… तालिबान नेता मुल्ला तुराबी बोला- सख्त इस्लामी कानून लागू करेंगे, फांसी भी देंगे

अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद अब कट्टर इस्लामी कानूनों को लागू किया जाएगा। तालिबान के संस्थापकों में से एक और इस्लामी कानून के जानकार मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी ने कहा है कि जल्द ही हम पुराने सरकार में दी जाने वाली सजाओं को लागू करेंगे। इसमें लोगों के हाथों को काटने से लेकर फांसी देने तक की सजा शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार ऐसी सजाएं सार्वजनिक रूप से नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे दी जाएंगी।
सार्वजनिक फांसी देगा तालिबान, हाथ भी काटेगा : समाचार एजेंसी एपी के साथ इंटरव्यू में मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी ने फांसी की सजा पर तालिबान की नाराजगी वाले दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने अफगानिस्तान की नई सरकार के खिलाफ किसी भी प्रकार की साजिश रचने को लेकर दुनिया को चेतावनी भी दी है। तालिबान की पिछली सरकार में फांसी की सजा आम तौर पर किसी स्टेडियम में दी जाती थी। इसे देखने के लिए भारी संख्या में लोगों की भीड़ पहुंचती थी।
इस्लामी कानूनों को जल्द लागू किया जाएगा : तुराबी ने कहा कि स्टेडियम में फांसी दिए जाने पर सभी ने हमारी आलोचना की, लेकिन हमने उनके कानूनों और उनकी सजा के बारे में कभी कुछ नहीं कहा। कोई हमें नहीं बताएगा कि हमारे कानून क्या होने चाहिए। हम इस्लाम का पालन करेंगे और कुरान पर अपने कानून बनाएंगे। तुराबी के बयानों के बाद कहा गया है कि तालिबान जल्द ही अपने पुराने शासन की सजाओं को लागू कर सकता है।
पिछली सरकार में न्याय मंत्री था तुराबी : 60 साल के तुराबी तालिबान की पिछली सरकार के दौरान न्याय मंत्री और तथाकथित पुण्य प्रचार विभाग के उपाध्यक्ष थे। इन्हीं के आदेशों पर धार्मिक पुलिस किसी को भी पकड़कर उसे इस्लामी कानूनों के नाम पर कड़ी सजा सुनाती थी। उस समय पूरी दुनिया तालिबान के ऐसे सजा की निंदा करती थी। इन्हें आमतौर पर स्टेडियम में या विशाल ईदगाह मस्जिद के मैदान में दिया जाता था।
सजा सार्वजनिक पर ट्रायल पर्दे के पीछे : हत्या के आरोपियों के सिर में एक गोली मारकर मौत दी जाती थी। यह गोली पीड़ित परिवार को कोई शख्स चलाता था। इसके अलावा ब्लड मनी का भी प्रावधान था। पीड़ित परिवार के पैसे लेकर समझौते को राजी होने पर आरोपी को माफ कर दिया जाता था। सजा भले ही सार्वजनिक दी जाती थी, लेकिन केस ट्रायल और दोषी ठहराए जाने की प्रक्रिया काफी गुप्त रखी जाती थी।

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