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रानिल विक्रमसिंघे के श्रीलंका का प्रधानमंत्री बनने पर क्या बोला भारत?

आर्थिक संकट के बाद हिंसा से जूझ रहे श्रीलंका में नई सरकार का गठन हो चुका है। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने गुरुवार को रानिल विक्रमसिंघे को श्रीलंका के प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई है। उन्होंने भारी विरोध के कारण इस्तीफा दे चुके महिंदा राजपक्षे की जगह ली है। श्रीलंका में नेतृत्व परिवर्तन के बाद भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है। कोलंबों में स्थित भारतीय उच्चायोग ने अपने बयान में आशा, प्रतिबद्धता और उम्मीद जैसे सकारात्मक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए श्रीलंका को हर तरह की मदद देने का वादा किया।
श्रीलंकाई सरकार के साथ काम करने की इच्छा जताई : श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री के रूप में रानिल विक्रमसिंघे के शपथ लेने के बाद भारतीय उच्चायोग ने कहा कि भारत लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के अनुसार गठित नई श्रीलंकाई सरकार के साथ काम करने को लेकर आशान्वित है तथा द्वीपीय राष्ट्र के लोगों के लिए नयी दिल्ली की प्रतिबद्धता जारी रहेगी। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने बुधवार को बंद कमरे में हुई चर्चा के बाद यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के 73 वर्षीय नेता को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया।
भारतीय उच्चायोग ने ट्वीट में क्या लिखा : भारतीय उच्चायोग ने एक ट्वीट में कहा कि श्रीलंका के लोगों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता जारी रहेगी। भारतीय उच्चायोग राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद करता है और वह श्रीलंका के प्रधानमंत्री के रूप में माननीय रानिल विक्रमसिंघे के शपथ ग्रहण के साथ लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के अनुसार गठित श्रीलंका सरकार के साथ काम करने को लेकर आशान्वित है।
राष्ट्रपति राजपक्षे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की तैयारी : श्रीलंका की संसद में 17 मई को राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी। प्रस्ताव पर चर्चा संसद में विशेष मंजूरी मिलने के बाद शुरू की जाएगी। संसद परिसर में पार्टी नेताओं की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में सदन के अध्यक्ष महिन्दा यापा अभयवर्धने ने कहा कि संबंधित प्रस्ताव तैयार किया जाएगा और राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि श्रीलंका में स्थायी सरकार के गठन और सांसदों की सुरक्षा सहित विभिन्न प्रस्ताव राष्ट्रपति राजपक्षे को सौंपे जाएंगे।

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