30.4 C
Madhya Pradesh
June 16, 2026
Pradesh Samwad
प्रदेशबिहार

पटना हाईकोर्ट ने निरस्‍त किया BPSC का फैसला, कहा- इस वजह से नौकरी के लिए उम्मीदवारी रद्द करने का कोई आधार नहीं

पटना हाई कोर्ट (Patna High Court) ने फैसला सुनाया है कि इंटरव्यू के दौरान शैक्षिक डिग्री प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने में विफलता सरकारी नौकरी के लिए उम्मीदवार की उम्मीदवारी को रद्द करने का आधार नहीं है। न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह की खंडपीठ ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के एक फैसले को अनुचित और अस्थिर बताते हुए रद्द कर दिया।
बीपीएससी ने कम से कम 13 उम्मीदवारों की उम्मीदवारी रद्द कर दी थी क्योंकि उन्होंने इंटरव्यू के दौरान अपने कॉलेजों की ओर से जारी इंजीनियरिंग डिग्री के मूल प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए थे। मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि इनकी उम्मीदवारी महज इस आधार पर रद्द नहीं की जा सकती कि उम्मीदवार ने यूनिवर्सिटी की ओर से जारी प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किए। मामले की सुनवाई 16 अगस्त को हुई और फैसला अगली रात अपलोड किया गया।
तीन उम्मीदवारों ने किया था हाई कोर्ट का रुख : तीन उम्मीदवारों- अनामिका आसन, नीशु कुमारी और विनीत कुमार ने पिछले महीने हाई कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में सहायक अभियंता के रूप में भर्ती के लिए पीटी और मेन्स परीक्षा पास की थी। उन्हें साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था लेकिन अंतिम चयन सूची में उनके नाम प्रकाशित नहीं किए गए थे।
प्रोविजनल प्रमाण पत्र जमा किए थे : अनामिका आसन और विनीत कुमार ने बीआईटी सिंदरी में पढ़ाई की, जबकि नीशु ने झारखंड के हजारीबाग में विनोबा भावे विश्वविद्यालय के तहत राम गोविंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से पास आउट किया। उन्होंने आवेदन पत्र के साथ संस्थानों की ओर से जारी की गई प्रोविजनल प्रमाण पत्र जमा किए थे। याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट से आग्रह किया कि इस साल 14 जुलाई को बीपीएससी की ओर से प्रकाशित अंतिम परिणाम को रद्द कर दिया जाए और उनकी उम्मीदवारी को वैध मानते हुए इसे फिर से प्रकाशित करने का निर्देश जारी किया जाए।
सुनवाई के दौरान पता चला कि बीपीएससी ने आठ और लोगों की उम्मीदवारी रद्द की : अदालत को बीपीएससी के जवाबी हलफनामे से पता चला कि आठ और उम्मीदवारों का साक्षात्कार लेने के बाद उसी आधार पर उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील हर्ष सिंह ने कहा कि विनोबा भावे विश्वविद्यालय के मानदंडों के अनुसार, इसके तहत संबंधित कॉलेजों की ओर से प्रोविजनल डिग्री प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं और दीक्षांत समारोह के दौरान डिग्री प्रदान की जाती है।
2012 में बीपीएसपी ने प्रोविजनल प्रमाण पत्र को वैध दस्तावेज माना था: वकील : अदालत ने इस तथ्य का न्यायिक नोटिस लिया कि विश्वविद्यालय में वर्षों से दीक्षांत समारोह नहीं होते हैं। वकील हर्ष सिंह ने यह भी प्रस्तुत किया कि बीपीएससी ने 2012 में पुरानी चयन प्रक्रिया के दौरान कॉलेजों की ओर से जारी प्रोविजनल प्रमाण पत्र को एक वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार कर लिया था।
महाधिवक्ता ललित किशोर ने तर्क दिया कि भर्ती विज्ञापन में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि उम्मीदवारों के पास भारतीय विश्वविद्यालय से योग्यता की डिग्री होनी चाहिए और उन्हें उनकी ओर से जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना जरूरी था। किशोर ने कहा कि इस आधार पर बीपीएससी ने याचिकाकर्ताओं की उम्मीदवारी को खारिज कर दिया था।

Related posts

साइबर क्राइम की रोक थाम के लिए नजदकी थाने में 5 लाख रुपये तक की धोखाधड़ी/ठगी की होगी शिकायत

Pradesh Samwad Team

शिवराज कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला, घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला को चार लाख तक की मिलेगी मदद

Pradesh Samwad Team

मध्य प्रदेश में छठी से बारहवीं कक्षा तक के स्कूल एक सितंबर से खुलेंगे

Pradesh Samwad Team

Leave a Comment