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August 5, 2026
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जबरन शादी के डर से घर छोड़ने को मजबूर अफगान महिलाएं, तालिबान का क्रूर चेहरा बेनकाब

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे वाले गांवों में आतंकी समूह का क्रूर और कट्टरपंथी चेहरा सभी के सामने आ रहा है। लड़ाके 15 साल तक की लड़कियों को निशाना बना रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक रुस्तक जिले में एक स्थानीय नागरिक से उसकी 15 साल की लड़की को आतंकियों को सौंपने के लिए कहा गया था, जिसके बाद वह भागकर काबुल आ गया जिस पर बीते रविवार तालिबान ने कब्जा कर लिया। अफगानिस्तान में इस तरह की महिलाओं की कई कहानियां मौजूद हैं जो आतंकियों से बचने के लिए अपना घर छोड़ चुकी हैं।
जबरन शादी के डर से छोड़ा घर : एनबीसी न्यूज से बात करते हुए 21 साल की लॉ स्टूडेंट दीयाना शरीफी ने बताया कि वह पिछले हफ्ते अपने शहर मजार-ए-शरीफ से भाग गई थीं। उन्हें डर था कि आतंकी उन्हें शादी के लिए मजबूर कर सकते हैं। शरीफी ने कहा कि डर, लाचारी और गुस्से के चलते उन्होंने घर छोड़ दिया क्योंकि उन्होंने सोचा वह अपने भाग्य का सामना करने के बजाय मरना पसंद करेंगी।
इसी तरह 23 साल की खालिदा योलची ने कहा कि उनके पिता ने उन्हें मयमाना शहर से बाहर जाने के लिए कहा था क्योंकि उन्हें डर था कि आतंकवादी उन्हें अगवा कर सकते हैं। एनबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘हम बहुत डरे हुए थे। उनके पास बंदूकें थी। उनके बाल और दाढ़ी बहुत लंबे थे।’
झूठे दावे कर रहा तालिबान : काबुल पर कब्जे के बाद तालिबान ने दावा किया था कि वह महिलाओं और बच्चों को उनके अधिकार देगा। जैसे-जैसे तालिबान का कब्जा अफगानिस्तान पर बढ़ता गया, समूह ने महिलाओं पर कड़े प्रतिबंध लागू करना शुरू कर दिए। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक पुरुष साथी के बिना महिलाओं के घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी गई है और उनका बुर्का पहनना अनिवार्य कर दिया गया है।
बैंकों में महिलाओं के लिए जगह नहीं : जून के आखिर में तालिबान के एक वरिष्ठ नेता ने घोषणा की थी कि रुस्तक जिले में 15 साल से अधिक उम्र की लड़कियों और 40 साल से कम उम्र की विधवाओं को समूह के लड़ाकों के साथ शादी कर लेनी चाहिए। महिलाओं ने जुलाई की शुरुआत में कंधार में जबरन नौकरी से निकाले जाने के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि हथियारबंद लोग उनके घरों में घुस आए और कहा कि महिलाओं के पुरुष रिश्तेदार बैंकों में उनकी जगह काम कर सकते हैं।
सरकार में शामिल होने की अपील : अजीजी बैंक में कार्यरत 43 साल की नूर खतेरा ने रॉयटर्स से बात करते हुए कहा कि काम पर वापस न जाना बहुत अजीब है लेकिन अब यही सच्चाई है। इन सब के बीच तालिबान यह जाहिर करने की कोशिश कर रहा है कि वह अपने पिछले शासन की तुलना में ज्यादा उदार है। मंगलवार को आतंकी समूह ने सरकारी कर्मचारियों के लिए ‘माफी’ की घोषणा और महिलाओं से उनकी सरकार में शामिल होने की अपील की।

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