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April 17, 2026
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संसद भवन, मेट्रो, सोलर सिस्टम के बाद अब हाउसिंग प्रॉजेक्ट…मॉरीशस को इतने गिफ्ट क्यों दे रहा भारत?


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मॉरीशस में भारत के सहयोग से बनी सोशल हाउसिंग प्रॉजेक्ट का उद्घाटन किया है। इस अवसर पर मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ ने भारत के सहयोग की तारीफ की। पीएम मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मॉरीशस में सिविल सर्विस कॉलेज और आठ मेगावाट की सोलर पीवी फार्म प्रॉजेक्ट्स की भी शुरुआत की। इस मौके पर भारत ने मॉरीशस में मेट्रो एक्सप्रेस परियोजना और दूसरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 19 करोड़ डॉलर की कर्ज फैसिलिटी देने का ऐलान भी किया। भारत ने इससे पहले भी मॉरीशस में संसद भवन और मेट्रो लाइन समेत विकास के कई काम किए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि भारत हमेशा से मॉरीशस को इतना सहयोग क्यों देता है।
हिंद महासागर में भारत का दोस्त है मॉरीशस : मॉरीशस हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का बड़ा दोस्त और साझेदार है। मॉरीशस सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से शुरू से ही भारत के काफी करीब रहा है। अंग्रेजों के शासन के समय इस देश में बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश और बिहार से लोगों को भेजा गया था। इसमें से अधिकतर लोग वहीं बस गए और फिर वापस अपने देश नहीं लौटे। यही कारण है कि इस देश में भारतीय मूल के लोग आज भी बड़ी संख्या में रहते हैं। मॉरीशस में भोजपुरी बोली का भी काफी असर है। मॉरीशस ने भारत में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मदद के तौर पर 200 ऑक्सिजन कंसंट्रेटर्स भेजे थे। भारतीय विदेश मंत्रालय ने मॉरीशस के इस सहयोग पर आभार भी जताया था।
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है मॉरीशस : भारत की सुरक्षा के लिए मॉरीशस का महत्व काफी ज्यादा है। हिंद महासागर में चीन तेजी से अपना वर्चस्व बढ़ा रहा है। हिंद महासागरीय देशों के फांसने के लिए चीनी सरकार बड़ी मात्रा में कर्ज भी दे रही है। ऐसे में अगर मॉरीशस भी चीन के पाले में चला जाता है तो यह भारत के लिए बड़ा खतरा होगा। इस समय श्रीलंका और मॉलदीव में चीन का बड़ा प्रभाव है। ये दोनों देश हिंद महासागर में बड़ा प्रभाव भी रखते हैं। ऐसे में अगर भारत को हिंद महासागर में प्रभुत्व जमाना है तो उसे मॉरीशस जैसे देशों को अपने प्रभाव में लाना ही होगा।
हिंद महासागर का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है भारत : भारत अगर मॉरीशस पर अपने प्रभाव को बनाए रखता है तो इससे चीन की मुश्किलें बढ़ सकती है। मॉरीशस के पास के समुद्री इलाके से होकर हर साल खरबों डॉलर का व्यापार होता है। अफ्रीकी महाद्वीप के नजदीक होने से इस देश से हिंद महासागर के बड़े इलाके पर नजर रखी जा सकती है। इस देश के पास ही रियूनियन द्वीप है। इस द्वीप पर फ्रांस का कब्जा है। फ्रांस ने इस द्वीप पर बड़ा मिलिट्री बेस बनाकर रखा हुआ है। मॉरीशस के उत्तर-पूर्व में डिएगो गार्सिया है, जहां अमेरिकी और ब्रिटिश मिलिट्री का बेस है।
मॉरीशस और भारत में करीबी रिश्ता : भारत और मॉरीशस के बीच संबंधों की मजबूती को इसी बात से समझा जा सकता है कि यह देश अपना राष्ट्रीय दिवस गांधीजी की नमक सत्याग्रह के वर्षगांठ के दिन यानी 12 मार्च को मनाता है। मॉरीशस का मानना है कि इसी की प्रेरणा से उसे 1968 में अंग्रेजों से आजादी मिली। भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता, ब्लू ओशन इकनॉमी, समुद्री सुरक्षा, एंटी पायरेसी ऑपरेशन जैसे कई महत्वपूर्ण अभियानों में मॉरीशस हमेशा भारत के साथ रहा है।
भारत ने मॉरीशस में बनाए मेट्रो और अस्पताल : भारत ने वर्ष 2016 में मॉरीशस को दिए गए 353 मिलियन अमेरिकी डॉलर का विशेष आर्थिक पैकेज के जरिए न्यू मॉरीशस सुप्रीम कोर्ट बिल्डिंग प्रोजेक्ट को शुरू किया था। इस बिल्डिंग का उद्धाटन साल 2020 में किया गया। इसके अलावा भारत की मदद से मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुईस में मेट्रो एक्सप्रेस सर्विस को शुरू किया गया। इसके अलावा 100-बेड वाले अत्याधुनिक ईएनटी अस्पताल का भी निर्माण भारत के सहयोग से किया गया है।
मॉरीशस के अगलेगा द्वीप को विकसित कर रहा भारत : भारत मॉरीशस के अगलेगा द्वीप को विकसित कर रहा है। भारत के सहयोग से इस द्वीप पर मौजूद सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है। भारत और मॉरीशस के बीच अगलेगा द्वीप के विकास को लेकर 2015 में समझौता किया गया था। पहले कई बार अफवाह भी उड़ चुकी है कि भारत ने इस द्वीप पर मिलिट्री बेस बनाकर रखा है। हालांकि भारत ने न तो इन दावों का खंडन किया है और न ही समर्थन। भारत ने इस द्वीप पर कई शिप जेट्टी और रनवे का विस्तार किया है। इसके अलावा भारतीय नौसेना मॉरीशन की नौसेना को अपने समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए ट्रेनिंग भी दे रही है।

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