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बच्चों के खिलाफ अपराध में नंबर वन है एमपी, सात हजार से अधिक नाबालिग लड़कियां लापता

नेशनल क्राइम रेकॉर्ड ब्यूरो ने क्राइम इन-2020 के नाम से एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट से यह प्रतीत होता है कि एमपी बच्चों के लिए सबसे असुरक्षित (MP Ranks Highest In Child Crime) जगह है। कोरोना के दौर में एमपी में सबसे ज्यादा बच्चों के खिलाफ अपराध हुए हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार एमपी में बच्चों के खिलाफ रेप की अधिकतम 3259 घटनाएं घटी हैं। इसके साथ ही गर्भपात, नवजातों का परित्याग और भ्रूणहत्या के 271 मामले सामने आए हैं। यह देश में सबसे अधिक मामले हैं।
पूरे देश में बच्चों के खिलाफ अपराध के 77,382 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें अकेले एमपी में 11,322 मामले दर्ज हुए हैं। वहीं, देश में बाल बलात्कार के 27,001 एक मामले दर्ज हुए हैं, इनमें 3,259 मामले अकेले एमपी में दर्ज हुए हैं। एमपी में गर्भपात, नवजातों का परित्याग और भ्रूणहत्या के भी 2020 में 271 मामले सामने आए हैं। यह पूरे देश का 18 फीसदी केस है। नवजात बच्चों को छोड़ने के मामले में भी एमपी नंबर वन है। साल 2020 में यहां सबसे ज्यादा 186 केस सामने आए हैं।
एनसीआरबी की रिपोर्ट कहती है कि एमपी में 2020 तक कुल 14.5 हजार नाबालिग बच्चे लापता हुए हैं। इनमें 8751 नाबालिग बच्चे 2020 में लापता हुए हैं। गायब हुए बच्चों में 7230 नाबालिग लड़कियां हैं। पिछले साल बच्चों के खिलाफ अपराध के सबसे ज्यादा मामले भी एमपी में दर्ज हुए हैं। 2020 में यहां 17008 मामले दर्ज हुए हैं। एमपी में बच्चों की कुल आबादी तीन करोड़ के करीब है।
आंकड़े में गलती? : एनसीआरबी की रिपोर्ट तालिका 1ए.4 में 2020 में एमपी में रेप के 2,339 मामले दर्ज किए गए हैं और तालिका 3ए.3 निर्दिष्ट करती है कि इस संख्या में छह साल की कम उम्र की दो लड़कियां, 12 साल की कम उम्र की सात लड़कियां और 16 से ऊपर और 18 से कम उम्र की एक लड़कियां शामिल हैं। उसी रिपोर्ट की तालिका 4ए.2 कहती है कि एमपी में बाल बलात्कार की 3,259 घटनाएं दर्ज की गई हैं। यदि आईपीसी की धारा 376 के तहत मामलों को पहले कॉलम के तहत सूचीबद्ध किया गया है, तो यह कैसे हैं कि बाल बलात्कार के मामले इससे अधिक हैं।

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