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बच्‍चों के लिए वो काम करता है मोबाइल, जो कभी-कभी पेरेंट्स भी नहीं कर पाते


टेक्‍नोलॉजी ने भले ही हमारी जिंदगी को आसान कर दिया हो लेकिन इससे सेहत को काफी नुकसान हुआ है। ऑफिस में हम दिनभर कंप्‍यूटर या लैपटॉप चलाते हैं जिसकी रेडिऐशन सेहत को खराब करती है और स्‍क्रीन की लाइट आंखों पर बुरा असर डालती है। इसके बाद हम मोबाइल इस्‍तेमाल करने लगते हैं और रात को सोने से पहले तक इससे चिपके रहते हैं।
बच्‍चों को भी अब मोबाइल की लत लग चुकी है। उन्‍हें मोबाइल पर कार्टून देखना, गाने सुनना अच्‍छा लगता है और अब लॉकडाउन में तो स्‍कूल भी कंप्‍यूटर और स्‍मार्टफोन में सिमट कर आ गया है। ऐसे में बच्‍चों के लिए मोबाइल का यूज काफी बढ़ गया है। इस मामले में सब यही सोचते हैं कि मोबाइल के ज्‍यादा इस्‍तेमाल से बच्‍चों की सेहत खराब होती है लेकिन क्‍या आपने कभी ये सोचा है कि अगर मोबाइल ही नहीं होता तो क्‍या नुकसान हो सकते हैं?
जी हां, हर चीज के दो पहलू होते हैं और जब मोबाइल इस्‍तेमाल करने के नुकसान हैं तो कुछ फायदे (mobile benefits for students) भी जरूर होंगे। यहां हम आपको बता रहे हैं कि अगर मोबाइल नहीं होता तो बच्‍चों के लिए इसके क्‍या नुकसान हो सकते थे।
​सेफ्टी की है बात : मोबाइल के आने के बाद बच्‍चों की सुरक्षा काफी आसान हो गई है। बच्‍चे कहीं भी बाहर जाएं, पेरेंट्स उनकी लोकेशन ट्रैक कर सकते हैं। किसी एमेरजेंसी में बच्‍चों की हेल्‍प के लिए मोबाइल काफी काम आता है।
बच्‍चा देर रात किसी पार्टी में गया और वहां से आते समय कार खराब हो गई या उसे लेट हो गया तो वो मोबाइल की मदद से अपने पेरेंट्स से कॉन्‍टैक्‍ट कर सकता है और हेल्‍प ले सकता है।
​घर पर हों अकेले : आजकल ज्‍यादातर पेरेंट्स वर्किंग हैं और ऑफिस में ही उनका सारा दिन निकलता है। ऐसे में बच्‍चे घर पर अकेले रहते हैं और इस समय उनका साथी और सुरक्षा गार्ड मोबाइल ही होता है। उन्‍हें कोई भी प्रॉब्‍लम हुई या घर की घंटी बजी तो वो फौरन कॉल कर के अपने पेरेंट्स को इसकी जानकारी दे सकते हैं।
​रख सकते हैं नजर : बड़े बच्‍चे तो समझदार होते हैं और वो कॉल कर के आपको सिचुएशन के बारे में बता सकते हैं लेकिन छोटे बच्‍चे ऐसा नहीं कर सकते। इनके लिए भी मोबाइल फोन काम आ सकता है। आजकल कई वर्किंग मदर घर पर बेबी को नैनी के पास छोड़ती हैं और घर में सीसीटीवी कैमरा लगाकर रखती हैं। वो इस कैमरे को अपने फोन से कनेक्‍ट कर के ऑफिस से ही घर में बच्‍चे पर नजर रखती हैं।
​एंटरटेनमेंट का है जरिया : जब पेरेंट्स को कोई जरूरी काम होता है या उन्‍हें घर से बाहर जाना होता है, तो वो बच्‍चों को फोन दे देते हैं और उनकी पसंद का कोई कार्टून या शो लगा देते हैं। इससे बच्‍चे भी एंटरटेन होते हैं और पेरेंट्स भी अपना काम कर पाते हैं।
​क्‍या है सही : पेरेंट्स इस बात को समझें कि किसी भी चीज की अति नुकसानदायक होती है और मोबाइल के मामले में भी कुछ ऐसा ही है। आप बच्‍चे के लिए मोबाइल के यूज को कंट्रोल कर के रखें।

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