19.2 C
Madhya Pradesh
October 24, 2026
Pradesh Samwad
देश विदेश

नेपाल ने भारत को दी बड़ी टेंशन, चीन के साथ महत्वकांक्षी BRI प्रॉजेक्ट पर फिर शुरू की बातचीत

नेपाल में शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद भारत के साथ अच्छे संबंधों की उम्मीद जताई जा रही थी। पिछले प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के कार्यकाल में सीमा सहित कई मुद्दों पर भारत और नेपाल के रिश्ते काफी नाजुक मोड़ पर पहुंच गए थे। लेकिन, अब देउबा सरकार ने भी ओली की राह पर चलते हुए चीन के साथ बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) पर दोबारा बातचीत शुरू कर दी है।
गरीब देशों को कर्ज के जाल में फंसाना चाहता है चीन : बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक महत्वकांक्षी योजना है। इसके जरिए चीन की योजना एशिया को अफ्रीका और यूरोप के साथ जमीनी और समुद्री मार्ग से जोड़ने की है। हालांकि, चीन इस परियोजना के पीछे गरीब देशों को भारी मात्रा में कर्ज देकर उन्हें अपना आर्थिक गुलाम बना रहा है। एशिया में श्रीलंका और लाओस चीन के बीआरआई प्रॉजेक्ट के सबसे बड़े शिकार हैं।
2017 में नेपाल ने किया था हस्ताक्षर : काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में बीआरआई प्रॉजेक्ट के जरिए स्वीकृत एक भी परियोजना अभी शुरू नहीं हुई है। नेपाल और चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव पर साल 2017 में हस्ताक्षर किए थे। नेपाल के कई सरकारी अधिकारियों के अनुसार, अब दोनों पक्षों के साथ मसौदा कार्यान्वयन योजना का आदान-प्रदान, परियोजनाओं पर बातचीत और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत उनके शुरू होने की उम्मीद है।
नेपाल की देउबा सरकार ने फिर से शुरू हुई बातचीत : इस रिपोर्ट में बताया गया है कि मसौदे पर काम कर रहे कम से कम तीन अधिकारियों के अनुसार, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने इस परियोजना को जल्द से जल्द शुरू करने का बीड़ा उठाया है। जबकि, प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्रालय जैसी अन्य एजेंसियां इनपुट प्रदान कर रही हैं। नेपाली विदेश मंत्रालय में उत्तर पूर्व एशिया डिवीजन के प्रमुख के रूप में तीन साल से अधिक समय तक सेवा देने वाले काली प्रसाद पोखरेल ने कहा कि चीन ने सरकार से कार्ययोजना की मांग की थी, ताकि वह जल्द से जल्द काम शुरू कर पाए।
भारत के कारण अबतक नेपाल ने नहीं दी थी मंजूरी : जब नेपाल ने 2017 में बीआरआई समझौते पर हस्ताक्षर किए, तो इसे नेपाल-चीन संबंधों में एक महत्वपूर्ण क्षण के रूप में देखा गया। लेकिन चीनी कार्यक्रम के तहत एक भी परियोजना शुरू नहीं होने के कारणों पर सवाल भी उठे थे। बताया जाता है कि भू-राजनीतिक स्थिति के कारण नेपाल सरकार ने चीन की इस परियोजना के खिलाफ अभी तक अनिच्छा दिखाई थी। नेपाल अभी तक भारत और अमेरिका के नाराज होने के कारण इस परियोजना को मंजूरी देने से आनाकानी कर रहा था।

Related posts

उत्तर कोरिया में भुखमरी के हालात: सनकी किंग ने जनता को दे दी कम खाने की सलाह

Pradesh Samwad Team

यूक्रेन में अमेरिकी एयर डिफेंस की तैनाती वाले प्रस्ताव पर भड़का रूस, बताया उकसाने वाली कार्रवाई

Pradesh Samwad Team

हैती के शरणार्थियों पर डोनाल्ड ट्रंप का ‘शर्मनाक’ बयान, बोले- इनमें से कई को AIDS, ये अमेरिका के लिए डेथ विश जैसे

Pradesh Samwad Team

Leave a Comment