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May 14, 2026
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अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों ने COVID-19 के खिलाफ बूस्टर शॉट की सिफारशि की


अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों ने बुधवार को सभी अमेरिकियों को कोविड -19 वर्धक (बूस्टर) खुराक लेने की सिफारिश की ताकि संक्रमण से उनकी सुरक्षा बढ़ायी जा सके। अधिकारियों ने यह सिफारिश ऐसे समय की है जब देश में डेल्टा मामलों में बढ़ोतरी के साथ ही इसके संकेत सामने आये हैं कि टीकों की प्रभावशीलता कम हो रही है।
रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के निदेशक और अन्य शीर्ष अधिकारियों द्वारा उल्लेखित योजना, लोगों को फाइजर या मॉडर्ना टीके की दूसरी खुराक लेने के आठ महीने बाद अतिरिक्त खुराक लेने की सिफारिश करती है।
अभी तैयार नहीं योजना : स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि जिन लोगों ने जॉनसन ऐंड जॉनसन की एकल खुराक वाला टीका प्राप्त किया है, उन्हें भी शायद अतिरिक्त खुराकों की आवश्यकता होगी। उन्होंने हालांकि कहा कि वे अधिक आंकड़े की प्रतीक्षा कर रहे हैं और अभी तक एक योजना तैयार नहीं की है।
चीन की ओर से पिछले कई हफ्तों में बैरिक की टीम और फोर्ट डेटरिक लैब की जांच की मांग की जा रही है। चीन ने इस लैब पर वायरस लीक होने का आरोप लगाया है जहां इबोला, स्मॉलपॉक्स, SARS, MERS और कोरोना जैसे घातक वायरस रखे जाते हैं। खुद अपना डेटा छिपाकर रखने वाले चीन के सरकारी मीडिया ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ-साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन से कहा है कि कोविड-19 फैलने में अमेरिका की इस लैब की भूमिका का सच भी सामने लाया जाए। चीन के प्रॉपगैंडा अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक लाखों लोग ने ऑनलाइन याचिका साइन की है और जांच की मांग की है। अखबार का कहना है कि इसमें चीन के लोगों के साथ-साथ अब दुनियाभर के लोग शामिल हैं।
पीपल्स डेली चाइना ने भी मांग की है कि अमेरिका WHO को अपने यहां जांच करने दे ताकि यह पता चले कि कोरोना वायरस रिसर्च में बना है या बन सकता है। अखबार का दावा है कि अमेरिका दुनिया में कोरोना वायरस स्टडी सबसे ज्यादा प्रैक्टिस और स्पॉन्सर किया जाता है। इसमें बारिक की टीम को मुख्य बताया गया है जो वायरस को मॉडिफाई कर सकती है और बना सकती है। शिन्हुआ के मुताबिक 1983 से बारिक ने 400 पेपर छापे हैं और इनमें से 268 पेपर कोरोना वायरस पर हैं। चीन का कहना है कि बारिक की रिसर्च और डेटरिक लैब के कारण ही सबसे पहले वायरस से इन्फेक्शन के केस सामने आए थे।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने अमेरिका से जुलाई 2019 में विस्कॉनसिन में फेफड़ों से जुड़ी बीमारी और सर्दियों में फ्लू के मरीजों पर डेटा जारी करने की मांग की है। झाओ का कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि इनमें से कितने लोगों को असल में कोविड-19 था। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक उसी साल अमेरिका के CDC ने डेटरिक लैब से काम बंद करने को कहा था। झाओ ने मांग की है कि 2019 में वुहान मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स में आए सैनिकों का डेटा भी जारी किया जाए। झाओ का आरोप है कि ऐसे रिसर्च में अमेरिका सबसे ज्यादा फंड करता है और अब वुहान लैब से वायरस लीक होने की कहानी गढ़ रहा है। इसके लिए वैज्ञानिकों पर दबाव डाल रहा है और मुखर वैज्ञानिकों को धमका रहा है जो ‘आतंकवाद’ है।
अधिकारियों ने कहा कि योजना को तीसरी खुराक की सुरक्षा और प्रभावशीलता को लेकर खाद्य और औषधि प्रशासन मूल्यांकन की अभी प्रतीक्षा है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक बयान में कहा कि यह ‘बहुत स्पष्ट’ है कि संक्रमण के खिलाफ टीकों की सुरक्षा समय के साथ कम हो जाती है, और ऐसे में जब अत्यधिक संक्रामक डेल्टा संस्करण तेजी से फैल रहा है, ‘हम हल्के और मध्यम लक्षण वाले संक्रमण के खिलाफ कम सुरक्षा के साक्ष्य देख रहे हैं।’

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