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अफगानिस्तान में ‘आग लगाने’ के बाद अब शरणार्थियों से डरा पाकिस्तान, दुनिया से की यह अपील

अफगानिस्तान में तालिबान को हथियार देकर जंग के लिए उकसाने वाला पाकिस्तान अब शरणार्थियों की बाढ़ से डरा हुआ है। पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) मोईद युसूफ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में ही विस्थापित लोगों को रखने के लिए सुरक्षित इलाके बनाने चाहिए। उन्होंने कहा कि इन शरणार्थियों को पाकिस्तान में धकेला नहीं जाना चाहिए जो और शरणार्थियों को स्वीकार करने की स्थिति में नहीं है।
अफगानिस्तान के भीतर शरणार्थियों को रोकने की अपील : अमेरिका की यात्रा पर गए पाकिस्तानी एनएसए मोईद यूसुफ ने वॉशिंगटन स्थित पाकिस्तानी दूतावास में दावा किया कि उनका देश यह सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है कि अफगानिस्तान में तनाव से और खून-खराबा नहीं हो। लेकिन, अगर ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है तो यह अतंरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है कि वह अफगानिस्तान के भीतर ही सुरक्षित इलाका बनाए।
अब अफगानियों से हमदर्दी जता रहा पाक : पाकिस्तान के एनएसए ने कहा कि क्यों उन्हें दर-बदर भटकने के लिए मजबूर किया जाए? उनके देश के भीतर ही उनके रहने की व्यवस्था की जाए। पाकिस्तान की और शरणार्थियों को लेने की क्षमता नहीं है। युसूफ ने अमेरिकी सरकार की नीति को व्यवहारिक और खेदहीन बताया लेकिन दंभयुक्त नहीं। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे बड़ी तस्वीर और सभी को गले लगाने वाली सुर्खियों को नहीं देखें।
आईएसआई चीफ भी अमेरिका में, कुछ दिन पहले गए थे चीन : उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के एनएसए देश की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के महानिदेशक फैज हमीद के साथ 27 जुलाई को अफगानिस्तान और द्विपक्षीय संबंधों पर अपने अमेरिकी समकक्ष से चर्चा के लिए वाशिंगटन आए थे। आईएसआई प्रमुख व्हाइट हाउस में अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन से बातचीत करने के बाद शुक्रवार को स्वदेश रवाना हो गए। इस बैठक में दोनों देशों के अन्य सुरक्षा अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।
पाक ने माना- तालिबान पर सीमित प्रभाव : युसूफ ने उन दावों से भी असहमति जताई कि पाकिस्तान का अफगान तालिबान पर प्रभाव है जिसके जरिये वे काम भी करा सकता है जो वे नहीं करना चाहते।उन्होंने कहा कि हमारा उन पर मामूली प्रभाव है और हमारा प्रभाव इतना होता कि जो कहते तो वे करते तो हम वर्ष 1990 के दशक में बामियान की बुद्ध प्रतिमा को तोड़ने से रोक देते। हम कम से कम तहरीक-ए- तालिबान पाकिस्तान को बाहर करने के लिए राजी कर लेते।
पाक से संपर्क बनाए रखेगा अमेरिका : युसूफ ने कहा कि दोनों देशों के एनएसए के बीच हुई पहली बैठक में द्विपक्षीय संपर्क को कायम रखने पर सहमति बनी। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर अफगानिस्तान का मुद्दा सबसे अहम और तात्कालिक है लेकिन यह बातचीत अन्य मुद्दों पर आगे बढ़ने को लेकर थी। इस सप्ताह की बैठक प्रक्रिया की समीक्षा की कड़ी थी।

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