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भोपाल के सरकारी अस्पताल में आग की घटना की उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में जांच हो : कमलनाथ


मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एक अस्पताल में आग लगने से चार नवजात शिशुओं की मौत के एक दिन बाद मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने इस घटना की उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में जांच करवाने की मांग की। इसके अलावा, उन्होंने मांग की कि दोषियों पर हत्या का प्रकरण दर्ज हो और जिम्मेदार मंत्री को पद से हटाया जाए। सरकार द्वारा संचालित कमला नेहरु बाल चिकित्सालय भवन की तीसरी मंजिल पर स्थित विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में सोमवार रात को भीषण आग लग गई थी, जिसमें चार शिशुओं की मौत हो गई। हादसे के वक्त इकाई में 40 नवजात शिशु भर्ती थे। इनमें से बचे 36 शिशुओं का दूसरे अलग-अलग वार्ड में उपचार किया जा रहा है। कमलनाथ ने कमला नेहरू बाल चिकित्साल पहुंकर घटना का जायजा लेने, पीड़ित परिजन से मुलाकात करने एवं भर्ती मासूम बच्चों का हाल-चाल जानने के बाद मंगलवार को मीडिया से कहा, ‘‘यह घटना राजनीति का विषय नहीं है, लेकिन व्यवस्था की लापरवाही तो सामने आयी है। छह महीने के अंदर यह तीसरी घटना हुई है।’’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘अस्पताल में अग्निशमन प्रणाली बंद थी। आग से बचाव के कोई इंतजाम नहीं थे। शॉर्ट सर्किट से आग लगने की यह घटना सामने आयी।’’ कमलनाथ ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में सरकार इस पूरे मामले की जांच करवाये।’’ मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के अतिरिक्त मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान द्वारा इस घटना की जांच कराये जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘जो खुद जिम्मेदार हैं, उनसे जांच करवायी जा रही है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘परिजन को बच्चों से मिलने नहीं दिया जा रहा है। मैंने ख़ुद अस्पताल के हालात देखे हैं। स्थिति बेहद भयावह है।’’ कमलनाथ ने कहा कि परिजन के अनुसार इस आग से करीब 150 बच्चे प्रभावित हुए हैं, जबकि सरकार कह रही है कि हादसे के वक्त इकाई में सिर्फ 40 नवजात शिशु भर्ती थे। उन्होंने कहा, ‘‘मै मांग करता हूं कि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो। जिम्मेदार मंत्री को पद से हटाया जाए। दोषियों पर हत्या का प्रकरण दर्ज हो।’’ पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “लेकिन भाजपा को इन मौतों से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। वह तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भोपाल में होने वाले 15 नवंबर के विशाल कार्यक्रम की तैयारियों में लगी हुई है। उन्हें पीड़ित परिवारों की कोई चिंता नहीं है।”

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