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नौकरी छोड़कर उठाई बंदूक, हजारों हत्याएं, लाखों बेघर.. ‘बर्बाद’ हो गया म्यांमार, तख्तापलट का 1 साल

फिजिशियंस फॉर हेल्थ राइट्स के मुताबिक सैन्य तख्तापलट के बाद से 30 स्वास्थ्यकर्मी मारे गये हैं और 286 गिरफ्तार किये गए हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के मुताबिक सैन्य तख्तापलट के बाद से 17 जनवरी तक 4,05,700 लोग विस्थापित हो गए।
म्यांमार में सैन्य शासन को एक साल पूरा : जकार्ता : बमबारी के बीच एक बूढ़ी महिला को भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। एक पूर्व शांति वार्ताकार ने म्यांमार सुरक्षा बलों से लड़ने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी। शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान एक महिला के पति को गोली मार दी गई, जिससे अपने दो बच्चों की देखभाल के लिए वह अकेली रह गई। म्यांमार की सेना द्वारा देश के लोकतांत्रिक चुनाव परिणामों को खारिज किए जाने और एक फरवरी 2021 को सत्ता पर कब्जा कर लेने, देशव्यापी शांतिपूण प्रदर्शनों पर सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई ने राष्ट्रव्यापी मानवीय संकट पैदा कर दिया।
देश के सबसे बड़े शहर यांगून में रहने वाली खिने ने बताया कि एक फरवरी को उसके पति को एक मित्र का फोन आया था, जिसमें सैन्य तख्तापलट की जानकारी दी गई थी। खिने ने बताया कि मार्च के अंत में प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों ने घातक कार्रवाई शुरू कर दी थी, तभी एक दिन प्रदर्शनकारियों ने उनके घर आकर बताया कि उसके पति को गोली मार दी गई है, जिसके चलते उसकी मौत हो गई।
तख्तापलट के बाद हो रहे प्रदर्शन : सेना ने 1490 लोगों को उतार दिया मौत के घाट – महिला ने कहा, ‘तख्तापलट से पहले, मैंने कभी सोचा तक नहीं था कि हमारा परिवार इस तरह बिखर जाएगा।’ असिस्टेंस एसोसिएशन फॉर पॉलिटिकल प्रिजनर्स के मुताबिक महिला का पति उन कम से कम 1,490 लोगों में शामिल था जिसकी सेना ने तख्तापलट के बाद हत्या कर दी। समूह के मुताबिक 11,775 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। अपने पति की मौत के बाद खिने अपने दो बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित है।
पड़ोसी देशों में विस्थापित हो गए 32,000 लोग : बम विस्फोटों, गोलीबारी और तोपों से गोलाबारी के चलते 63 वर्षीय मी कहती है कि उसे पिछले साल भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। मी ने कहा, ‘जब वहां थी गोलीबारी की आवाज सुनाई देती थी।’ संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के मुताबिक सैन्य तख्तापलट के बाद से 17 जनवरी तक 4,05,700 लोग विस्थापित हो गए और 32,000 पड़ोसी देशों में पलायन कर गए। मी ने कहा, ‘मैं चिंतित हूं और थक गई हूं।’
‘मैंने हथियार उठाने का फैसला किया’ : सैन्य तख्तापलट से पहले, विशेषज्ञ बनने के लिए पढ़ाई कर रहे 28 वर्षीय सहायक सर्जन ने कहा, ‘सैन्य तख्तापलट के बाद हमने उनके मातहत काम नहीं करने का विकल्प चुना।’ फिजिशियंस फॉर हेल्थ राइट्स के मुताबिक सैन्य तख्तापलट के बाद से 30 स्वास्थ्यकर्मी मारे गए हैं और 286 गिरफ्तार किए गए हैं। अपने साथी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को सेना द्वारा सिर में गोली मारे जाते देखने के बाद 47 वर्षीय एक पूर्व शांति वार्ताकार ने कहा, ‘मैंने हथियार उठाने का फैसला किया।’

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