23.1 C
Madhya Pradesh
August 17, 2026
Pradesh Samwad
देश विदेश

जर्मनी बोला- टकराव हुआ तो हो सकता है तीसरा विश्व युद्ध


जर्मनी ने नाटो को रूस के साथ सीधे सैन्य टकराव (Russia NATO War) से बचने की सलाह दी है। जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज ने आशंका जताई कि अगर नाटो और रूस टकराते हैं तो इससे तीसरा विश्व युद्ध (Third World War) हो सकता है। चांसलर स्कोल्ज ने डेर स्पीगल के साथ एक इंटरव्यू में रूस के साथ अपने तेल और गैस आयात (Russia Germany News) को तुरंत न रोकने के फैसले का बचाव भी किया। जर्मनी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर है, यही कारण है कि नाटो का सदस्य होते हुए भी जर्मनी ने रूस के लेकर हमेशा से नरम रूख दिखाया है। हाल में अमेरिका और बाकी नाटो देशों के दबाव के कारण जर्मनी ने भी यूक्रेन को सीमित मात्रा में सैन्य साजो सामान भेजा है।
यूक्रेन को मदद न करने पर आलोचना का सामना कर रहा जर्मनी : ओलाफ स्कोल्ज को यूक्रेन को भारी हथियार जैसे टैंक और होवित्जर न देने के लिए अपने देश और विदेशों में आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। जिसके बाद जर्मन सरकार ने कई बार यूक्रेन के पक्ष में बयान भी दिया है, लेकिन रूस के खिलाफ बाकी देशों जितने कड़े कदम नहीं उठाए हैं। चांसलर स्कोल्ज से पूछा गया कि उन्होंने क्यों सोचा कि यूक्रेन को टैंक देने से परमाणु युद्ध हो सकता है, इसपर उन्होंने कहा कि ऐसा कोई रूल बुक नहीं है जिसमें कहा गया हो कि जर्मनी को यूक्रेन में युद्ध का पक्ष माना जा सकता है।
जर्मन चांसलर बोले- फूंक-फूंककर कदम रख रहे : जर्मन चांसलर ने कहा कि इसलिए यह और भी महत्वपूर्ण है कि हम हर कदम पर बहुत सावधानी से विचार करें और एक दूसरे के साथ नजदीकी से काम करें। उन्होंने यह भी कहा कि इस तनाव में नाटो को शामिल होने से बचाना मेरे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए मैं चुनावों पर ध्यान केंद्रित नहीं करता या तीखी आलोचनाओं से खुद को परेशान नहीं होने देता। एक भी गलत कदम उठाया गया तो उसके परिणाम भयंकर होंगे।
रूसी तेल-गैस पर तुरंत प्रतिबंध न लगाने पर यह कहा : स्कोल्ज ने यूक्रेन पर आक्रमण के जवाब में रूसी गैस के जर्मनी में आयात को तुरंत समाप्त नहीं करने के अपने फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि गैस पर प्रतिबंध लगाने से युद्ध खत्म हो जाएगा। अगर पुतिन को आर्थिक प्रतिबंधों का डर होता तो वे कभी भी इस भयंकर युद्ध को शुरू नहीं करते। दूसरा, आप लोग ऐसे सोचते हैं कि यह पैसे के बारे में था, लेकिन यह एक नाटकीय आर्थिक संकट और लाखों नौकरियों और कारखानों को नुकसान से बचाने के बारे में है। अगर ये बंद हो गए होते तो इनके दरवाजे फिर कभी नहीं खुल पाते।

Related posts

यूएस स्टॉक मार्केट धड़ाम हुआ, अमेरिका में रिकॉर्डतोड़ महंगाई, 40 सालों का रिकॉर्ड टूटा

Pradesh Samwad Team

फ्रांस के राष्ट्रपति भवन में हुए ‘बलात्कार’ के मामले की जांच जारी, महिला सैनिक ने लगाया था आरोप

Pradesh Samwad Team

100 करोड़ या 200 करोड़ के चक्कर में न पड़ें, देखें कौन से देश में कितनी लगी वैक्सीन

Pradesh Samwad Team

Leave a Comment