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जानिए भोपाल की अंतिम गोंड शासक रानी कमलापति के बारे में जिनके नाम से जाना जाएगा हबीबगंज स्टेशन

मध्य प्रदेश सरकार ने हबीबगंज स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति स्टेशन करने का फैसला किया है। परिवहन विभाग की तरफ से इस संबंध में गृह मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है। अब गृह मंत्रालय पहले रेलवे से सहमति लेगा ताकि पता चल सके कि इस नाम का कोई स्टेशन पहले से न हो। इसके बाद गृह मंत्रालय रेलवे को नाम बदलने के लिए निर्देशित करेगा। 15 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस रेलवे स्टेशन का लोकार्पण करने भोपाल आ रहे हैं।
निजाम शाह की रानी थीं कमलापति : रानी कमलापति गिन्नौरगढ़ के मुखिया निजाम शाह की विधवा गोंड शासक थीं। निजाम शाह गोंड राजा थे और उनकी सात पत्नियां थी। इनमें से एक रानी कमलापति थीं। परियों की तरह खूबसूरत रानी कमलापति राजा की सबसे प्रिय पत्नी थीं। उस समय निजाम शाह के भतीजे आलम शाह का बाड़ी पर शासन था। उसे अपने चाचा निजाम शाह से काफी ईर्ष्या थी। कहा जाता है कि आलम शाह को निजाम शाह की दौलत और संपत्ति के साथ कमलापति की खूबसूरती से भी ईर्ष्या थी। आलम शाह रानी कमलापति की खूबसूरती पर मोहित था। उसने रानी से अपने प्यार का इजहार भी किया था, लेकिन रानी ने उसे ठुकरा दिया था।
अपनों ने कर दी थी निजाम शाह की हत्या : आलम शाह अपने चाचा निजाम शाह के खिलाफ लगातार षडयंत्र करता था। एक बार उसने खाने में जहर मिलाकर उनकी हत्या कर दी। खुद को इन षडयंत्रों से बचाने के लिए रानी कमलापति अपने बेये नवल शाह को गिन्नौरगढ़ से भोपाल के रानी कमलापति महल लेकर आ गईं। परेशान रानी कमलापति अपने शौहर की मौत का बदला लेना चाहती थीं, लेकिन इसके लिए उनके पास न तो फौज थी और न ही पैसे।
दोस्त मोहम्मद खान ने की रानी कमलापति की मदद : इसी दौरान उनकी मुलाकात दोस्त मोहम्मद खान से हुई। इतिहासकारों के मुताबिक दोस्त मोहम्मद खान पहले मुगल सेना का हिस्सा था, लेकिन लूटी हुई संपत्तियों के हिसाब में गड़बड़ी के बाद उसे निकाल दिया गया था। इसके बाद उसने भोपाल के नजदीक जगदीशपुर पर अपना शासन स्थापित कर लिया था। रानी ने अपने पति की मौत का बदला लेने के लिए दोस्त मोहम्मद से मदद मांगी। दोस्त मोहम्मद ने इसके बदले रानी से एक लाख रुपये मांगे जिसे देने के लिए वह तैयार हो गईं।
रानी के बेटे को मारकर दोस्त मोहम्मद ने किया था भोपाल पर कब्जा : दोस्त मोहम्मद ने बाड़ी के राजा पर हमला कर उसकी हत्या कर दी। इस काम से रानी खुश हो गईं, लेकिन करार के मुताबिक वह दोस्त मोहम्मद को एक लाख रुपये नहीं दे पाईं। इसके बदले में उन्होंने भोपाल का एक हिस्सा उसे दे दिया। इस समय तक रानूृी कमलापति का बेटा नवल शाह बड़ा हो चुका था। नवल शाह को दोस्त मोहम्मद का भोपाल के एक हिस्से पर कब्जा मंजूर नहीं था। इसको लेकर दोनों के बीच लड़ाई हुई। जानकारी के मुताबिक दोस्त मोहम्मद ने नवल शाह को धोखे से जहर देकर मार दिया और पूरे भोपाल रियासत पर कब्जा कर लिया।

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