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August 18, 2026
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वोटिंग ट्रेंड तो देखिए… कांग्रेस ने यूं ही यूपी में नहीं लगाया महिलाओं पर दांव, क्या पार लगेगी चुनावी नाव?

यूपी की चुनावी बिसात पर कांग्रेस ने पहला दांव आधी आबादी को लेकर चल दिया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की महिलाओं को 40 फीसदी टिकट देने की घोषणा के बाद से यूपी की जातीय गणित में दमखम रखने वाले सियासी दल अब इसका राजनीतिक तापमान नापने में जुट गए हैं।
कयास लगाए जा रहे हैं कि यूपी के वोटरों में 45 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाली महिलाओं को इस बार चुनावी राजनीति में ज्यादा भागीदारी मिल सकती है। हालांकि, इससे चुनावी तस्वीर कितना बदलेगी, इसको लेकर अलग-अलग नजरिए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि प्रियंका के इस दांव से महिलाओं के अगुआई की बहस जरूर तेज होगी।
वोट देने में आगे, टिकट पाने में पीछे : यूपी के कुल 14.61 करोड़ वोटरों में 6.70 करोड़ वोटर महिलाएं हैं। कांग्रेस का दांव इन्हीं पर है। 2019 के लोकसभा चुनाव का ट्रेंड देखें तो यूपी में एक-तिहाई से ज्यादा जिलों में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत पुरुषों से कहीं ज्यादा था। खासतौर पर बुंदेलखंड, पश्चिम और पूर्वांचल के कई जिलों में महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में वोट देने में ज्यादा भागीदारी निभाई।
इसके बावजूद राजनीतिक दलों से टिकट पाने में महिलाएं पीछे रही हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 46, सपा ने 34, बसपा ने 21 और कांग्रेस ने 12 महिलाओं को टिकट दिए थे। इनमें 41 महिलाएं विधायक बन पाईं। इनमें से सिर्फ चार को ही सरकार में मंत्री बनाया गया और इस वक्त एक भी महिला कैबिनेट मंत्री नहीं है। कांग्रेस के पास भी दो महिला विधायक हैं, जिनमें एक भाजपा के संपर्क में हैं।
महिलाएं भाजपा की प्राथमिकता पर हैं। पार्टी ने पहले ही सबसे ज्यादा टिकट महिलाओं को दिए थे। पंचायत चुनावों में हमने उन्हें सबसे ज्यादा सम्मान दिया। इस बार भी हमारा संसदीय बोर्ड महिलाओं को पूरा सम्मान देगा।
स्वतंत्र देव सिंह, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ; लखनऊ विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र के पूर्व निदेशक प्रो.राकेश चंद्रा कहते हैं कि जब तक महिलाओं की निर्णयों और उच्च पदों पर भागीदारी नहीं बढ़ेगी, तब तक उनका सशक्तीकरण नहीं किया जा सकता। कांग्रेस का फैसला अच्छा जरूर है पर यूपी में कांग्रेस की राजनैतिक स्थिति को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि इसका महिलाओं की स्थिति पर असर कितना पड़ेगा। यह जरूर है कि अन्य राजनीतिक दलों पर इस फैसले का दबाव जरूर पड़ेगा।
हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी : भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह कहते हैं कि महिलाएं भाजपा की प्राथमिकता पर हैं। पार्टी ने पहले ही सबसे ज्यादा टिकट महिलाओं को दिए थे। पंचायत चुनावों में हमने उन्हें सबसे ज्यादा सम्मान दिया। इस बार भी हमारा संसदीय बोर्ड महिलाओं को पूरा सम्मान देगा।
भाजपा के महामंत्री जेपीएस राठौर कहते हैं कि भाजपा के पास ही सबसे ज्यादा महिला प्रतिनिधि हैं। इनमें महिला सांसद, विधायक, एमएलसी और जिला पंचायत अध्यक्ष बीजेपी ने ही जिताए हैं।
वहीं, सपा के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि सपा सरकार ने महिलाओं को फोकस करके ही कन्या विद्या धन योजना शुरू की। महिलाओं की सुरक्षा के लिए 1090 हेल्पलाइन शुरू की। महिलाओं के सम्मान के लिए अनेक कदम उठाए गए। टिकट में भी सभी वर्गों की भागीदारी होगी। बसपा के प्रवक्ता डॉ.. एमएच खान कहते हैं कि हमारी तो मुखिया ही महिला हैं। उनसे ज्यादा महिलाओं के लिए कोई फिक्रमंद नहीं। हम उन्हें हिस्सेदारी भी सबसे ज्यादा देंगे।

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